Raat Akeli Hai: The Bansal Murders Review – सस्पेंस और समाज की परतों में उलझी कहानी, नवाजुद्दीन का संयमित अभिनय बना ताकत
नेटफ्लिक्स की मर्डर मिस्ट्री ‘Raat Akeli Hai: The Bansal Murders’ में नवाजुद्दीन सिद्दीकी की दमदार परफॉर्मेंस असर छोड़ती है, हालांकि कुछ किरदार और रिश्ते अधूरे से महसूस होते हैं।
20 दिसंबर 2025, नई दिल्ली
नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई नवाजुद्दीन सिद्दीकी स्टारर फिल्म ‘Raat Akeli Hai: The Bansal Murders’ एक बार फिर क्राइम थ्रिलर की गंभीर और स्याह दुनिया में ले जाती है। करीब पांच साल पहले आई ‘Raat Akeli Hai’ की कहानी अब नए अध्याय के साथ लौटती है, जहां हत्या की जांच सिर्फ अपराध तक सीमित नहीं रहती, बल्कि आस्था, अंधविश्वास और सिस्टम की राजनीति से टकराती नजर आती है।
कहानी
फिल्म की कहानी उत्तर प्रदेश के कानपुर में रहने वाले प्रभावशाली बंसल परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है। एक ही रात में परिवार के छह लोगों की रहस्यमयी मौत पूरे शहर में सनसनी फैला देती है। हाई प्रोफाइल मामला होने की वजह से जांच पर हर स्तर से दबाव रहता है। केस की कमान इंस्पेक्टर जटिल यादव (नवाजुद्दीन सिद्दीकी) के हाथों में दी जाती है।
जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ती है, परिवार, रिश्तेदारों और करीबियों के बयान सच्चाई को और उलझाते जाते हैं। कहानी अंधविश्वास, काले जादू, आध्यात्मिक गुरु और अवैध राजनीति जैसे मुद्दों को छूती है। फिल्म यह सवाल उठाती है कि क्या सच तक पहुंचने की राह जानबूझकर मोड़ी जाती है और क्या सिस्टम हमेशा न्याय के साथ खड़ा रहता है।
अभिनय
नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने इंस्पेक्टर जटिल यादव के किरदार को बेहद सादगी और गहराई के साथ निभाया है। न ओवरड्रामा, न ही हीरो बनने की कोशिश—बस एक थका हुआ, ईमानदार अफसर, जो सच्चाई के लिए सिस्टम से लड़ता है। यह उनका एक शांत लेकिन असरदार अभिनय कहा जा सकता है।
राधिका आप्टे कैमियो में नजर आती हैं। उनका रोल छोटा है, लेकिन जटिल की जिंदगी में एक भावनात्मक ठहराव लाता है।
चित्रांगदा सिंह मीरा के किरदार में मजबूत और रहस्यमयी नजर आती हैं। उनके विश्वास और निजी संघर्ष कहानी में बेचैनी और शक पैदा करते हैं।
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दीप्ति नवल आध्यात्मिक गुरु के रोल में डर और शांति का अजीब संतुलन बनाती हैं। रेवती फॉरेंसिक डॉक्टर के रूप में तर्क और विज्ञान की आवाज बनती हैं। रजत कपूर डीजीपी के रूप में सिस्टम की सोच दिखाते हैं, जबकि संजय कपूर बंसल परिवार की अंदरूनी राजनीति को सामने लाते हैं। इला अरुण मां के किरदार में भावनात्मक गहराई जोड़ती हैं।
निर्देशन और स्क्रीनप्ले
निर्देशक हनी त्रेहन ने फिल्म को बनावटी ट्विस्ट्स से दूर रखा है। कहानी धीरे-धीरे आगे बढ़ती है और दर्शक को सोचने का मौका देती है। कैमरा वर्क सधा हुआ है और अंधेरे, सन्नाटे भरे फ्रेम माहौल को गंभीर बनाते हैं। कुछ जगह फिल्म की रफ्तार धीमी जरूर पड़ती है, लेकिन यह कहानी की गहराई को नुकसान नहीं पहुंचाती।
कमियां
फिल्म के कुछ दृश्य जरूरत से ज्यादा खिंचे हुए लगते हैं, खासकर हत्या वाली जगह के सीन। आध्यात्म और अंधविश्वास से जुड़े हिस्सों को और स्पष्ट किया जा सकता था। नवाजुद्दीन और राधिका के रिश्ते को भी ज्यादा गहराई नहीं मिल पाती, जिससे वह अधूरा सा लगता है। संजय कपूर का किरदार अहम होते हुए भी पूरी तरह खुल नहीं पाता।
देखें या नहीं
अगर आप तेज रफ्तार थ्रिलर के शौकीन हैं, तो यह फिल्म आपको थोड़ी भारी लग सकती है। लेकिन अगर आप क्राइम स्टोरी में माहौल, सामाजिक सवाल और दमदार अभिनय तलाशते हैं, तो ‘Raat Akeli Hai: The Bansal Murders’ जरूर देखी जा सकती है।
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