मकबूल से पान सिंह तोमर तक: Irrfan Khan, जो हर रोल में…

मकबूल से पान सिंह तोमर तक: Irrfan Khan, जो हर रोल में खुद को भूल गए और किरदार जो आज भी ज़िंदा हैं

Irrfan Khan की जयंती पर याद किए जा रहे हैं उनके अमर किरदार, जिन्होंने मकबूल से लेकर पान सिंह तोमर और पीकू तक भारतीय सिनेमा को नई गहराई दी।

7 जनवरी 2026, नई दिल्ली

दिवंगत अभिनेता Irrfan Khan भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका सिनेमा, उनकी आवाज़ और उनकी आंखों की खामोश अदाकारी आज भी दर्शकों के दिलों में जीवित है। 7 जनवरी 1967 को जन्मे इरफान ने अप्रैल 2020 में इस दुनिया को अलविदा कह दिया, मगर वे अपने दमदार किरदारों के ज़रिए हमेशा याद किए जाते रहेंगे।

Irrfan Khan उन कलाकारों में शामिल थे, जिनकी मौजूदगी भर से सीन में जान आ जाती थी। उनकी आंखें संवाद बोलती थीं और उनकी सादगी हर उम्र के दर्शक को छू जाती थी। उनकी जयंती के मौके पर आइए नज़र डालते हैं उन फिल्मों और किरदारों पर, जिन्होंने उन्हें अमर बना दिया।

मकबूल (2003)

विशाल भारद्वाज की इस फिल्म में Irrfan Khan ने मकबूल का किरदार निभाया, जो अंडरवर्ल्ड डॉन जहाँगीर खान का भरोसेमंद साथी होता है। शेक्सपियर के ‘मैकबेथ’ पर आधारित इस कहानी में इरफान की गहराई से भरी परफॉर्मेंस ने उन्हें इंडस्ट्री में अलग पहचान दिलाई।

हासिल (2003)

तिग्मांशु धूलिया की इस फिल्म में रणविजय सिंह के रूप में Irrfan Khan ने ऐसा प्रभाव छोड़ा कि उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट विलेन अवॉर्ड मिला। इलाहाबाद यूनिवर्सिटी की छात्र राजनीति पर बनी इस फिल्म ने उनके करियर को नई ऊंचाई दी।

लाइफ इन ए मेट्रो (2007)

मुंबई की ज़िंदगी और रिश्तों की उलझनों को दिखाती इस फिल्म में मोंटी के रूप में Irrfan Khan का सहज अभिनय दर्शकों को खूब पसंद आया। यह फिल्म उस साल की बड़ी हिट फिल्मों में शामिल रही।

साहेब बीवी और गैंगस्टर (2011)

उजड़ी रियासत के सुल्तान इंद्रजीत सिंह के किरदार में इरफान ने दर्द, गुस्सा और टूटे हुए आत्मसम्मान को बेहद प्रभावशाली ढंग से पर्दे पर उतारा।

पान सिंह तोमर (2011)

यह फिल्म Irrfan Khan के करियर का मील का पत्थर साबित हुई। एक एथलीट से बागी बने पान सिंह तोमर की भूमिका के लिए उन्हें नेशनल अवॉर्ड मिला और अंतरराष्ट्रीय सिनेमा में भी उनकी पहचान बनी।

लाइफ ऑफ पाई (2012)

आंग ली की इस हॉलीवुड फिल्म में Irrfan Khan ने पाई पटेल की कहानी सुनाने वाले किरदार के ज़रिए वैश्विक स्तर पर सम्मान हासिल किया।

द लंचबॉक्स (2013)

साजन फर्नांडिस के रूप में Irrfan Khan की सादगी और अकेलापन दर्शकों के दिलों को छू गया। यह फिल्म उनके करियर की सबसे यादगार रोमांटिक फिल्मों में गिनी जाती है।

यह भी पढ़े: Realme 16 Pro सीरीज की कीमत लॉन्च से पहले लीक, जानिए क्या होंगे फीचर्स

हैदर (2014)

विशाल भारद्वाज की इस फिल्म में रूहदार का छोटा लेकिन बेहद असरदार किरदार निभाकर Irrfan Khan ने एक बार फिर अपनी अभिनय क्षमता साबित की।

पीकू (2015)

राणा चौधरी के रूप में Irrfan Khan ने पिता-बेटी की कहानी में हास्य और संवेदनशीलता का बेहतरीन संतुलन बनाया।

हिंदी मीडियम (2017)

राज बत्रा के किरदार में Irrfan Khan ने आम आदमी की सोच और शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए दर्शकों से गहरा जुड़ाव बनाया।

छोटा पर्दा: चंद्रकांता

90 के दशक में दूरदर्शन के मशहूर धारावाहिक ‘चंद्रकांता’ में Irrfan Khan ने डबल रोल निभाकर टीवी दर्शकों के बीच भी अपनी पहचान बनाई।

Irrfan Khan आज भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके किरदार, उनकी फिल्मों और उनकी कला ने उन्हें हमेशा के लिए अमर बना दिया है।

यह भी पढ़े: यश की ‘Toxic’ से सामने आया रुक्मणी वसंत का फर्स्ट लुक, मेलिसा के किरदार में आएंगी नजर

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *