Mastiii 4 Review: न दीवानियत, न हैवानियत… सिर्फ बोरियत, एडल्ट कॉमेडी भी…
FW Review
Mastiii फ्रेंचाइज़ी की चौथी फिल्म ‘Mastiii 4’ दर्शकों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरती. कमजोर राइटिंग, फीकी कॉमेडी और ढीला निर्देशन फिल्म को बोरिंग बनाते हैं।
21 नवंबर 2025, नई दिल्ली
एडल्ट कॉमेडी के लिए मशहूर मस्ती फ्रेंचाइज़ी की नई फिल्म Mastiii 4 शुक्रवार को सिनेमाघरों में रिलीज़ हो गई है। दर्शकों के बीच बनी उत्सुकता के बावजूद यह फिल्म मनोरंजन के मामले में बेहद कमजोर साबित होती है। न इसमें वह बोल्ड ह्यूमर है जिसकी सीरीज़ से उम्मीद की जाती है और न ही ऐसी कॉमेडी जो दर्शकों को बांधे रख सके।
कहानी का हाल
फिल्म तीन दोस्तों—रितेश देशमुख, विवेक ओबेरॉय और आफताब शिवदासानी—की कहानी दिखाती है, जो वैवाहिक परेशानियों से जूझ रहे हैं। इसी दौरान उनके मित्र अरशद वारसी और नोरा फतेही उन्हें लव वीज़ा का कॉन्सेप्ट बताते हैं, जिसके तहत पति को एक हफ्ते तक पूरी आज़ादी मिलती है। कहानी यहीं से आगे बढ़ती है, लेकिन स्क्रीन पर यह कॉन्सेप्ट प्रभाव नहीं छोड़ पाता।
फिल्म क्यों नहीं चल पाती?
- फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी स्क्रिप्ट और स्क्रीनप्ले है।
- शुरुआत से ही कहानी ढीली रहती है,
- जोक्स असर नहीं करते,
- और कई सीन्स बिना किसी उद्देश्य के बढ़ाए हुए लगते हैं।
पहले हाफ में फिल्म बेहद कमजोर है, जबकि सेकेंड हाफ में कहीं-कहीं हल्की हंसी जरूर आती है, मगर वह भी कम और बेअसर। ट्रेलर में दिखाए गए कई डायलॉग और सीन फिल्म में बदल दिए गए हैं, जिससे A सर्टिफिकेट का भी कोई खास मतलब नहीं रह जाता।
लोकेशंस और संगीत थोड़ा बेहतर हैं, लेकिन यह फिल्म को बचाने के लिए पर्याप्त नहीं।
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कलाकारों का प्रदर्शन
रितेश देशमुख अपनी ओर से पूरी कोशिश करते दिखते हैं, लेकिन कमजोर पटकथा उनके अभिनय को सहारा नहीं देती।
आफ़ताब शिवदासानी फिल्म के सबसे मजबूत परफॉर्मर साबित होते हैं।
विवेक ओबेरॉय कई जगह ओवरएक्टिंग करते नज़र आते हैं।
तुषार कपूर का किरदार असंगत और अनावश्यक लगता है।
महिला कलाकारों को भी पर्याप्त स्पेस नहीं दिया गया, जिससे उनका प्रदर्शन औसत ही रह जाता है।
राइटिंग और डायरेक्शन पर सवाल
मिलाप जावेरी द्वारा निर्देशित इस फिल्म में न कहानी की पकड़ है और न निर्देशन की स्पष्टता।
डायलॉग कमजोर हैं और सीन्स में कॉमेडी का वह असर नहीं झलकता, जिसकी वजह से मस्ती सीरीज़ लोकप्रिय हुई थी।
‘Mastiii 4’ दर्शकों को एंटरटेन करने में नाकाम रहती है।
फिल्म में न एडल्ट ह्यूमर है, न स्मूद कॉमेडी और न ही ऐसी कहानी जो इसे देखने लायक बनाए।