Rajkummar Rao की आंखों से छलकता है किरदार का दर्द, पर पटकथा ने खो दी पकड़
नई दिल्ली, 12 जुलाई 2025
रेटिंग: ⭐⭐⭐ (3/5)
Rajkummar Rao की नई फिल्म ‘Malik’ आज सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। यह एक गैंगस्टर ड्रामा है, जो एक आम आदमी के सत्ता के भूखे अपराधी में बदलने की दास्तान को पेश करती है। निर्देशक पुलकित की यह फिल्म जहां एक ओर Rajkummar Rao के प्रभावशाली अभिनय से सजी है, वहीं दूसरी ओर इसकी कहानी और लंबाई दर्शकों को थका सकती है।
कहानी: अपराध की राह पर एक आम आदमी
फिल्म की कहानी 1980 के दशक के प्रयागराज में स्थापित है, जहां एक सीधा-साधा नौजवान धीरे-धीरे अपराध की दुनिया में कदम रखता है। सामाजिक अन्याय, धोखा और सत्ता की ललक उसे ऐसा मोड़ देती है कि वह सत्ता का मालिक तो बन जाता है, लेकिन आत्मा का दिवालिया हो जाता है। फिल्म का पहला भाग उसके संघर्ष और उदय को दर्शाता है, जबकि दूसरा भाग उसके पतन और आत्ममंथन को लेकर है। यही दूसरा भाग फिल्म की सबसे कमजोर कड़ी बन जाता है।
Rajkummar Rao का अभिनय: फिल्म की जान
Rajkummar Rao फिल्म के केंद्र में हैं और उन्होंने एक गैंगस्टर की भूमिका को इतनी सच्चाई से जिया है कि कई जगहों पर दर्शक उनके साथ सहानुभूति महसूस करते हैं। वह सिर्फ एक क्रूर अपराधी नहीं, बल्कि एक भावुक इंसान भी नजर आते हैं जो वक्त और हालातों के हाथों मजबूर हो जाता है। उनका अभिनय फिल्म को नई ऊंचाई देता है – हर डायलॉग, हर एक्सप्रेशन में गहराई है।
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अन्य कलाकारों का प्रदर्शन
मानुषी छिल्लर ने उनकी पत्नी के रोल में ठीक-ठाक काम किया है, लेकिन भावनात्मक दृश्यों में वह कमजोर दिखती हैं। प्रोसेनजीत चटर्जी, जो कि एक अनुभवी अभिनेता हैं, का किरदार अधूरा और अनावश्यक महसूस होता है। वहीं, सौरभ शुक्ला और अंशुमान पुष्कर ने अपने छोटे-छोटे किरदारों में जान डाल दी है। स्वानंद किरकिरे भी कम समय में असर छोड़ते हैं।
निर्देशन और तकनीकी पहलू
निर्देशक पुलकित ने प्रयागराज की गलियों और 80 के दशक के माहौल को बेहतरीन ढंग से पर्दे पर उतारा है। सिनेमैटोग्राफी उम्दा है और एक्शन सीक्वेंस बेहद रियल लगते हैं। खासतौर पर Rajkummar Rao का एक सीन जिसमें वह अकेले चार लोगों से भिड़ते हैं, दर्शकों को रोमांचित कर देता है।
हालांकि, फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी स्क्रिप्ट और लंबाई है। ढाई घंटे से अधिक की फिल्म में अगर कहानी भटके तो दर्शक ऊबने लगते हैं, और यही यहां हुआ है। दूसरे भाग में कहानी दिशा से भटकती है और गति बहुत धीमी हो जाती है।
संगीत और प्रस्तुति
बैकग्राउंड स्कोर कहानी के साथ अच्छा मेल खाता है, लेकिन कोई ऐसा गीत नहीं है जो फिल्म से निकलकर ज़ेहन में रह जाए। प्रोडक्शन डिज़ाइन काफी प्रभावी है और 80 के दशक को सच्चाई से पेश करता है।
‘Malik’ कोई नई कहानी नहीं कहती, लेकिन जिस अंदाज में यह पेश की गई है, वह सराहनीय है। यह फिल्म पूरी तरह Rajkummar Rao के कंधों पर टिकी है और उन्होंने उसे गिरने नहीं दिया। अगर आपको कंटेंट-ड्रिवन सिनेमा पसंद है और आप Rajkummar Rao के अभिनय के फैन हैं, तो ‘Malik’ एक बार जरूर देखी जा सकती है।
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