Vikrant Massey और शनाया कपूर की ‘Aankhon Ki Gustakhiyan’ ने जीता दिल,…

Vikrant Massey और शनाया कपूर की 'Aankhon Ki Gustakhiyan' ने जीता दिल, एक खामोश मगर असरदार प्रेम कहानी

Aankhon Ki Gustakhiyan: एहसासों का वो सफर जिसे महसूस किया जाता है, देखा नहीं जाता

नई दिल्ली, 12 जुलाई 2025

Vikrant Massey और शनाया कपूर की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘Aankhon Ki Gustakhiyan’ आज सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है और पहले ही दिन इसने उन दर्शकों के दिलों में खास जगह बना ली है जो प्रेम कहानियों को सिर्फ संवादों से नहीं, भावनाओं से महसूस करना चाहते हैं। निर्देशक संतोष सिंह की यह फिल्म एक ऐसी संवेदनशील और गहराई भरी कहानी कहती है जो शोरगुल भरे रोमांस से बिल्कुल अलग है।

कहानी की खूबसूरती: चुप्पियों में पनपता प्यार


फिल्म की शुरुआत एक ट्रेन यात्रा से होती है, जहां दो अनजान लोग एक-दूसरे के सामने बैठते हैं। Vikrant Massey एक दृष्टिहीन संगीतकार की भूमिका में हैं जो दुनिया को सुनकर और महसूस करके जीते हैं, वहीं शनाया कपूर एक थिएटर आर्टिस्ट के किरदार में हैं जो अपने सपनों की तलाश में निकली हैं। दोनों के बीच कोई जबरदस्ती का रोमांस नहीं दिखाया गया है, बल्कि नजरों, खामोशियों और अनकहे जज़्बातों के ज़रिए एक रिश्ता पनपता है जो बेहद गहरा है।

यह फिल्म यह दिखाने में सफल रहती है कि प्यार सिर्फ शब्दों का मोहताज नहीं होता – कई बार बिना कुछ कहे भी दिल जुड़ जाते हैं।

अभिनय: Vikrant Massey का असरदार अभिनय, शनाया का उम्मीद भरा आगाज़


Vikrant Massey ने एक बार फिर यह साबित किया है कि वह अभिनय की बारीकियों को समझते हैं। उनका किरदार संवेदनशील, शांत और बेहद प्रभावशाली है। उनकी बॉडी लैंग्वेज, आवाज़ और छोटी-छोटी प्रतिक्रियाएं उनके किरदार की आत्मा को दर्शकों तक पहुंचाने में सफल होती हैं।

शनाया कपूर ने इस फिल्म से अपना फिल्मी सफर शुरू किया है। शुरुआत के तौर पर उन्होंने संतुलित प्रदर्शन किया है। डायलॉग डिलीवरी में थोड़ी झिझक दिखती है, लेकिन उनकी मासूमियत और स्क्रीन प्रेजेंस उन्हें एक भरोसेमंद नई कलाकार के रूप में स्थापित करती है। Vikrant Massey और शनाया की केमिस्ट्री स्क्रीन पर खामोश लेकिन गहराई से भरी नजर आती है, जो फिल्म की खासियत बन जाती है।

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निर्देशन और तकनीकी पक्ष


संतोष सिंह का निर्देशन फिल्म को आत्मा देता है। सीमित लोकेशन – एक ट्रेन का कोच – को उन्होंने इतना खूबसूरत बना दिया है कि दर्शक पूरी कहानी उसी जगह पर बंधे रहते हैं। सिनेमैटोग्राफी विशेष रूप से उल्लेखनीय है; खिड़की से आती रौशनी, सायास कैमरा मूवमेंट्स और क्लोज-अप्स ने दृश्यात्मक प्रभाव को और गहरा किया है।

फिल्म की एडिटिंग अच्छी है, हालांकि शुरुआती भाग थोड़ा धीमा लगता है। लेकिन धीरे-धीरे जैसे किरदारों का जुड़ाव बढ़ता है, दर्शक भी कहानी के साथ बहने लगते हैं।

संगीत: कहानी की आत्मा


विशाल मिश्रा का संगीत फिल्म का दिल है। टाइटल ट्रैक ‘Aankhon Ki Gustakhiyan’ को जुबिन नौटियाल ने अपनी मखमली आवाज़ में गाया है और इसके बोल मनोज मुंतशिर ने लिखे हैं जो सीधे दिल में उतरते हैं। अन्य गाने भी कहानी में इतने खूबसूरती से पिरोए गए हैं कि वे किरदारों के जज़्बातों को और गहराई दे देते हैं।

फिल्म क्यों देखें?


‘Aankhon Ki Gustakhiyan’ उन दर्शकों के लिए एक ट्रीट है जो फिल्मों में शोर नहीं, एहसास ढूंढते हैं। यह फिल्म सादगी से बुनी गई है, जिसमें प्रेम दिखावा नहीं, अनुभव है। अगर आप इमोशनल, धीमी लेकिन असरदार कहानियों के प्रेमी हैं, तो यह फिल्म आपको निराश नहीं करेगी।

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