Sur Jyotsna awards : विरासत, साधना और सुरों की अमर गूंज को समर्पित एक भावपूर्ण संध्या
नई दिल्ली, 24 अप्रैल — राजधानी में आयोजित 13वें Sur Jyotsna National Music Awards
ने भारतीय शास्त्रीय संगीत की विरासत, स्मृति और उत्कृष्टता का अद्भुत संगम पेश किया।
यह भव्य समारोह केवल महान कलाकारों को सम्मानित करने तक सीमित नहीं रहा।
बल्कि, इसने संगीत की आध्यात्मिक शक्ति और उसकी अनंत परंपरा को नई ऊर्जा भी दी।
इस प्रतिष्ठित समारोह में हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की दो महान विभूतियों — सुमित्रा गुहा और
पंडित लक्ष्मण कृष्णराव पंडित — को उनके अद्वितीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
🎵 संगीत: आत्मा को छूने वाली साधना
कार्यक्रम के दौरान, लोकमत मीडिया ग्रुप के एडिटोरियल बोर्ड के चेयरमैन विजय दर्डा ने संगीत के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि संगीत इंसान को एक अलग दुनिया में ले जाता है। जहां आत्मिक शांति और ईश्वर से जुड़ाव का अनुभव होता है।
इसके अलावा, उन्होंने अपनी दिवंगत पत्नी ज्योत्स्ना दर्डा को याद किया। उन्होंने बताया कि संगीत के प्रति उनका प्रेम ही इस मंच की प्रेरणा बना।
Sur Jyotsna Awards की प्रेरणा
Sur Jyotsna Awards की स्थापना ज्योत्स्ना दर्डा की स्मृति में की गई थी।
वे लोकमत सखी मंच की संस्थापक थीं और संगीत की गहरी समझ रखती थीं।
यह पुरस्कार हर साल उत्कृष्ट कलाकारों को सम्मानित करता है। साथ ही, उभरते प्रतिभाशाली
कलाकारों को भी प्रोत्साहित करता है।
डॉ. आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजन
नई दिल्ली के डॉ. आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में यह समारोह आयोजित हुआ।
कार्यक्रम की शुरुआत और समापन प्रसिद्ध गायक कैलाश खेर और उनके बैंड के शानदार प्रदर्शन से हुआ।
नतीजतन, पूरे माहौल में सुरों की गूंज छा गई।

सुमित्रा गुहा: भाव और भक्ति की आवाज
आंध्र प्रदेश से संबंध रखने वाली और मुंबई में स्थापित सुमित्रा गुहा हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की प्रमुख हस्ती हैं।
उनकी गायकी में भावनात्मक गहराई और आध्यात्मिकता साफ झलकती है।
इसके साथ ही, उन्होंने कर्नाटक संगीत और हिंदुस्तानी शैली का सुंदर संगम प्रस्तुत किया है।
उन्हें 2010 में पद्मश्री और 2020 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।
पंडित लक्ष्मण कृष्णराव पंडित: परंपरा की पहचान
5 मार्च 1934 को जन्मे पंडित लक्ष्मण कृष्णराव पंडित ग्वालियर घराने के वरिष्ठ गायक हैं।
उनकी संगीत यात्रा पांच पीढ़ियों की समृद्ध परंपरा को दर्शाती है।
समारोह में उन्होंने अपने संघर्ष के दिनों को याद किया।
उन्होंने बताया कि वे दिल्ली में कनॉट प्लेस के पास बैठकर रियाज करते थे।
एक बार, एक पुलिसकर्मी ने उनसे सवाल किया। तब उन्होंने उसे संगीत का महत्व समझाया।
उन्होंने कहा कि रियाज उनके जीवन का अहम हिस्सा है। क्योंकि, बिना अभ्यास के वे खुद को अधूरा महसूस करते हैं।
नौ शहरों में आयोजन
इस वर्ष Sur Jyotsna Awards देश के नौ प्रमुख शहरों में आयोजित किए गए।
इनमें नागपुर, यवतमाल, नासिक, छत्रपति संभाजीनगर, कोल्हापुर, पुणे, मुंबई, बेंगलुरु और नई दिल्ली शामिल हैं।
इसका उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों की संगीत परंपराओं को सम्मान देना था। साथ ही, अधिक दर्शकों तक पहुंच बनाना भी लक्ष्य रहा।
गरिमामयी उपस्थिति
इस अवसर पर कई प्रमुख हस्तियां उपस्थित रहीं।
इनमें केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले और श्रिपद नाइक शामिल थे।
इसके अलावा, जस्टिस संदीप मेहता, पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आज़ाद, लोकेश मुनि,
किरण चोपड़ा और कार्तिकेय शर्मा भी मौजूद रहे।
परंपरा और भविष्य का संगम
Sur Jyotsna Awards का यह संस्करण परंपरा और भविष्य का संगम बनकर उभरा।
यह आयोजन महान कलाकारों के प्रति श्रद्धांजलि था। वहीं, नई पीढ़ी के संगीतकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बना।
अंततः, भारतीय शास्त्रीय संगीत की यह विरासत ऐसे आयोजनों से जीवित और प्रासंगिक बनी रहेगी।
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