Film Review: ‘Tanvi: The Great’ दिल को छू जाने वाला, सच्चाई से भरा सिनेमा अनुभव
Tanvi: The Great: अनुपम खेर की भावनात्मक वापसी, निर्देशन में दिखी गहराई और सहजता
नई दिल्ली, 17 जुलाई 2025
रेटिंग: 🌟🌟🌟🌟 (4/5)
‘Tanvi:The Great’ एक ऐसी फिल्म है जो सिनेमा के माध्यम से दिलों को छू लेने वाला अनुभव बन जाती है। यह सिर्फ एक ऑटिस्टिक लड़की की कहानी नहीं है, बल्कि एक बेटी के वादे, एक पिता के अधूरे सपने और उन रिश्तों की गहराई की बात करती है, जो शब्दों से नहीं बल्कि भावनाओं से बंधे होते हैं। अनुपम खेर के निर्देशन में बनी यह फिल्म नाटकीयता से दूर, एक सादगी और संवेदनशीलता से भरी दुनिया रचती है — जहाँ प्रेम, साहस और आत्म-सम्मान एक नई परिभाषा पाते हैं। यह कहानी हर उस दर्शक को भीतर तक छूती है, जो सच्ची और अर्थपूर्ण कहानियों की तलाश में है।
यह कहानी है 21 साल की एक ऑटिस्टिक युवती तन्वी रैना की, जो अपने दिवंगत पिता की उस अधूरी ख्वाहिश को पूरा करना चाहती है, जिसमें उन्होंने सियाचिन में भारतीय तिरंगे को सलामी देने की इच्छा जताई थी। अपने पिता के बलिदान और सपने से प्रेरित होकर, तन्वी भारतीय सेना में शामिल होने का निर्णय लेती है।
निर्देशन: अनुपम खेर की सूक्ष्म लेकिन शानदार वापसी
अनुपम खेर को हमनें परदे पर हर तरह के किरदार निभाते हुए देखा है — संवेदनशील भूमिकाएं, भावुक पात्र और कभी-कभी हल्के-फुल्के हास्य में भी। लेकिन इस बार वो निर्देशक की कुर्सी पर लौटे हैं, लगभग दो दशकों के बाद। ‘Tanvi: The Great’ किसी भी तरह का शोरगुल नहीं करती। यह फिल्म न तो भारी ड्रामा करती है और न ही चौंकाने वाले मोड़ों पर निर्भर करती है। यह एक शांत, गहरे एहसास वाली कहानी है — एक ऑटिस्टिक लड़की और उसके दिवंगत पिता के सपने को लेकर उसकी यात्रा, और यही सादगी इसे ख़ास बनाती है।
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कहानी: एक बेटी का वादा और एक पिता का सपना
फिल्म की नायिका तन्वी (शुभांगी दत्त) एक शांत स्वभाव वाली ऑटिस्टिक युवती है, जिसमें असाधारण गायकी की प्रतिभा है। उसकी मां, विद्या रैना (पल्लवी जोशी) एक ऑटिज्म विशेषज्ञ हैं और सिंगल मदर भी, जिन्हें न्यूयॉर्क जाना होता है। मजबूरन वो तन्वी को लैंसडाउन में उसके दादा कर्नल रैना (अनुपम खेर) के पास छोड़ देती हैं, जो ऑटिज्म को समझ नहीं पाते और तन्वी से जुड़ने में मुश्किल महसूस करते हैं।
धीरे-धीरे दोनों के बीच छोटे-छोटे पलों से एक बंधन बनता है। तन्वी को जब पता चलता है कि उसके पिता समर प्रताप रैना (करण टाकर), एक आर्मी अफसर थे जो देश के लिए शहीद हो गए थे, तो वह खुद भी सेना में भर्ती होने का निश्चय करती है। उसकी इस यात्रा में मेजर कैलाश श्रीनिवासन (अरविंद स्वामी), संगीत शिक्षक राज़ साहब (बोमन ईरानी) और ब्रिगेडियर जोशी (जैकी श्रॉफ) जैसे किरदार उसकी मदद करते हैं।
अभिनय: शुभांगी दत्त ने दिल जीत लिया
नवोदित अभिनेत्री शुभांगी दत्त ने तन्वी का किरदार इतनी सहजता और मासूमियत से निभाया है कि वो कहीं से भी एक्टिंग नहीं लगती। हर भाव, हर संवाद में एक सच्चाई झलकती है, और यही उनकी सबसे बड़ी खूबी बन जाती है। अनुपम खेर ने दादा के किरदार में वर्षों बाद बेहद प्रामाणिक और भावनात्मक परफॉर्मेंस दी है। जैकी श्रॉफ की छोटी सी भूमिका में भी आत्मीयता है। अरविंद स्वामी एक पूर्व सैनिक की भूमिका में गहराई और विश्वसनीयता लाते हैं, वहीं बोमन ईरानी का किरदार फिल्म में गर्मजोशी जोड़ता है।
लेखन और निर्देशन: एक संवेदनशील और सधा हुआ दृष्टिकोण
फिल्म का पहला हिस्सा बेहद संतुलित और स्पष्ट स्क्रिप्ट पर आधारित है। सुमन अंकुर, अभिषेक दीक्षित और अनुपम खेर की लेखन टीम ने हर किरदार का परिचय बहुत सोच-समझकर दिया है। हर भावनात्मक पल को पर्याप्त समय मिलता है। फिल्म में ऑटिज्म को जिस तरीके से दिखाया गया है, वो सबसे प्रभावशाली हिस्सा है — नाटकीयता से परे, बेहद वास्तविक और संवेदनशील प्रस्तुति। हालांकि फिल्म का दूसरा हिस्सा थोड़ा लंबा लगता है और गति थोड़ी धीमी हो जाती है, लेकिन रुचि बनी रहती है।
निष्कर्ष: साहस और सहानुभूति का एक मूक उत्सव
‘Tanvi: The Great’ केवल ऑटिज्म या भारतीय सेना पर आधारित फिल्म नहीं है। यह रिश्तों, समझ और संवेदनाओं की कहानी है। यह दिखाता है कि कैसे सच्ची सहानुभूति और प्यार किसी भी सपने को पंख दे सकते हैं। इसमें न कोई चीख-पुकार है, न कोई भारी-भरकम संवाद। बस सच्चे रिश्ते हैं और गहरे अनुभव। यह फिल्म ज़ोर से नहीं बोलती, लेकिन देखने के बाद आपके दिल में ज़रूर गूंजती है — और कई बार, बस यही किसी कहानी का सबसे बड़ा जादू होता है।
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