Single Papa Review: हल्की-फुल्की कहानी में दिल छू लेने वाला सफर, कुनाल…

Single Papa Review: हल्की-फुल्की कहानी में दिल छू लेने वाला सफर, कुनाल खेमू–नेहा धूपिया की परफॉर्मेंस सीरीज को बनाती है खास

आधुनिक पेरेंटिंग, इमोशन और कॉमेडी के सहज मेल के साथ ‘Single Papa’ एक ऐसे पिता की यात्रा दिखाती है जो खुद को बदलना सीखता है।

12 दिसंबर 2025, नई दिल्ली

नेटफ्लिक्स की नई वेब सीरीज Single Papa आज रिलीज हो गई है और यह बिना किसी भारी भरकम ड्रामा के एक सरल लेकिन संवेदनशील कहानी पेश करती है। सीरीज आधुनिक परिवार, जिम्मेदारी और इमोशन को हल्के और सहज अंदाज़ में दर्शाती है। इसमें एक ऐसे साधारण इंसान की कहानी दिखाई गई है, जिसे अचानक ऐसी जिम्मेदारी मिलती है जो उसकी पूरी ज़िंदगी बदल देती है।

कहानी

छह एपिसोड की इस ड्रामा-कॉमेडी सीरीज में कुनाल खेमू गौरव गेहलोत की भूमिका निभाते हैं—एक ऐसा व्यक्ति जो हमेशा जिम्मेदारियों से दूर भागता रहा है।
लेकिन एक दिन उसकी कार की पिछली सीट पर एक छोटा बच्चा मिल जाता है, और यह घटना उसकी सोच पूरी तरह बदल देती है। बच्चा उसे इतना पसंद आता है कि वह उसे गोद लेने का फैसला कर लेता है।

यहीं से शुरू होता है गौरव का असली संघर्ष—परिवार की राय, समाज की जजमेंट और एडॉप्शन एजेंसी के कड़े नियम। एजेंसी की मिसेज नेहरा (नेहा धूपिया) गौरव की क्षमता पर सवाल उठाती हैं और मानती हैं कि अकेला पिता बच्चे की अच्छी परवरिश नहीं कर सकता।

जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, गौरव गलतियाँ करता है, सीखता है, और धीरे-धीरे एक बेहतर इंसान और संभावित पिता बनता जाता है। कहानी में बड़े ट्विस्ट नहीं हैं, लेकिन गौरव और बच्चे का विकसित होता रिश्ता सीरीज को दिलकश बना देता है। यह संदेश भी मिलता है कि माता-पिता बनने के लिए परफेक्ट होना जरूरी नहीं—इरादा और कोशिश मायने रखते हैं।

एक्टिंग

कुणाल खेमू का अभिनय सहज और नैचुरल है। वे गौरव की झिझक, उसके डर और उसकी कोशिशों को बहुत वाकई अंदाज़ में दिखाते हैं।
कुछ इमोशनल दृश्यों में असर थोड़ा हल्का लगता है, लेकिन कुल मिलाकर वह भूमिका में जचते हैं।

नेहा धूपिया अपने सख्त और नियमों पर अडिग किरदार में प्रभाव छोड़ती हैं। उनकी उपस्थिति कहानी में ज़रूरी तनाव और मजबूती लाती है।

मनोज पाहवा और आयेशा रज़ा मिश्रा गौरव के माता-पिता के रूप में बेहद स्वाभाविक लगते हैं, और परिवार वाले दृश्यों में वास्तविकता भरते हैं।
प्राजक्ता कोली, अंकुर राठी, सुहैल नय्यर और ईशा तलवार कहानी में ऊर्जा और ताजगी जोड़ते हैं। दयानंद शेट्टी नैनी की भूमिका में हल्का-फुल्का हास्य लाते हैं और कई दृश्यों को मजेदार बना देते हैं।

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लेखन और निर्देशन

इशिता मोइत्रा और नीरज उद्दवानी का लेखन सरल और सुगम है। डायलॉग सीधे और आसानी से जुड़ने वाले हैं।
निर्देशन शशांक खेतान, इशिता मोइत्रा और नीरज उद्दवानी ने मिलकर किया है, और तीनों ने मिलकर कहानी को आरामदायक गति दी है।

सीरीज कई बार घर की याद दिलाती है और आम जिंदगी जैसी लगती है, हालांकि कुछ दृश्य उम्मीद के मुताबिक अनुमानित भी लगते हैं।

कमियां

Single Papa की सबसे बड़ी कमी है कि यह विषय की गहराई में उतना नहीं जाती।
गौरव के भीतर की उथल-पुथल, समाज का दबाव और आधुनिक पेरेंटिंग की चुनौतियाँ—इन सब पर और विस्तार होता तो कहानी और प्रभावी बन सकती थी।
कुछ एपिसोड हल्के पड़ जाते हैं और गति धीरे महसूस होती है।

देखें या नहीं?

अगर आपको परिवार, भावनाओं और हल्के-फुल्के हास्य की कहानियाँ पसंद हैं, तो Single Papa एक अच्छा विकल्प है।
यह एक ऐसे आदमी की यात्रा है जो साबित करना चाहता है कि पिता भी संवेदनशील, जिम्मेदार और अच्छा माता-पिता बन सकते हैं।

सहज कहानी, अच्छे कलाकार और घर जैसा एहसास इस सीरीज को एक बार देखने लायक जरूर बनाते हैं।

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