Tere Ishk Mein Review: धनुष ने भावनाओं से रचा जादू, जीशान अय्यूब…
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धनुष और कृति सेनन की ‘Tere Ishk Mein’ एक दर्द, जुनून और अधूरी मोहब्बत की कहानी है। शानदार परफॉर्मेंस और कुछ कमजोरियों के बीच फिल्म दिल छूने में सफल रहती है।
28 नवंबर 2025, नई दिल्ली
धनुष और कृति सेनन की फिल्म ‘Tere Ishk Mein’ आज बड़े पर्दे पर रिलीज हो चुकी है, और शुरुआत से ही यह फिल्म दर्शकों को एक भावनात्मक सफर पर ले जाती है। कहानी जितनी सीधी लगती है, उसके भाव उतने ही गहरे हैं। शुरुआत में ही एक मजबूत मोड़ फिल्म को पकड़ बना देता है और जैसे-जैसे शंकर और मुक्ति की जिंदगी के राज खुलते हैं, कथा और रोचक बन जाती है।
कहानी: एक रिसर्च, एक रिश्ता और सात साल की दूरी
कहानी शंकर गुरुक्कल (धनुष) की है—DU के छात्र संघ अध्यक्ष, जो अपने गुस्से और दबंग स्वभाव के लिए मशहूर है। वहीं मुक्ति (कृति सेनन) एक रिसर्च स्कॉलर है, जो यह साबित करना चाहती है कि हिंसा के रास्ते चलने वाला इंसान भी बदल सकता है। वह शंकर को अपने शोध का विषय बना लेती है, जिससे दोनों की मुलाकातें बढ़ती हैं और रिश्ता धीरे-धीरे प्यार में बदल जाता है।
शंकर खुद को बदलने की कोशिश करता है, लेकिन प्यार और जिंदगी की राह दोनों के लिए एक जैसी नहीं होती। पीएचडी पूरी होने के बाद उनके रिश्ते में आई दूरी और सात साल बाद मिलने पर पैदा हुई कड़वाहट कहानी को और भावुक बना देती है। इसी हिस्से में फिल्म अपनी असली ताकत दिखाती है।
एक्टिंग: धनुष का दर्द, कृति की sincerity और जीशान की चमक
धनुष फिल्म का सबसे भावुक और मजबूत हिस्सा हैं। उनकी आंखों का दर्द, चेहरे पर उभरी कशिश और गुस्से में छिपी बेचैनी—हर फ्रेम में असर छोड़ती है। कृति सेनन ने ईमानदार अभिनय किया है, हालांकि कुछ दृश्यों में धनुष का प्रभाव उन्हें हल्का कर देता है।
लेकिन सबसे बड़ा सरप्राइज मोहम्मद जीशान अय्यूब हैं। छोटा किरदार है, पर दिल पर गहरी छाप छोड़ जाता है। धनुष और जीशान का एक सीन रांझणा की याद दिला देता है—वही दोस्ती, वही भावनाएं, वही गहराई। प्रकाश राज भी कम लेकिन प्रभावशाली भूमिका में नजर आते हैं।
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निर्देशन: भावनाओं की पकड़ मजबूत, लेकिन दूसरा हाफ सुस्त
आनंद एल राय ने पहले हाफ में कहानी को मजबूती से पकड़ रखा है। कई दृश्य बेहद खूबसूरत और भावनात्मक हैं—शंकर का बदलना, परिवार के साथ उसके रिश्ते, बनारस की झलक।
हालांकि दूसरे हाफ में कुछ सीन कहानी से भटकते दिखते हैं और फिल्म थोड़ी लंबी महसूस होने लगती है। स्क्रिप्ट कई जगह कमजोर लगती है, फिर भी फिल्म का इमोशनल कोर दर्शकों को बांधे रखता है।
संगीत: असरदार बैकग्राउंड स्कोर, लेकिन गाने याद नहीं रहते
ए. आर. रहमान का नाम आते ही उम्मीदें बढ़ जाती हैं। फिल्म का संगीत कहानी से मेल खाता है, पर गाने उतनी देर तक असर नहीं छोड़ते। हालांकि बैकग्राउंड स्कोर जरूर भावनाओं को ऊंचाई देता है।
देखें या नहीं?
अगर आपको गहरी, जुनूनी और दिल तोड़ देने वाली प्रेम कहानियाँ पसंद हैं, तो ‘Tere Ishk Mein एक बार जरूर देखी जा सकती है।
फिल्म में कमियां हैं, लेकिन धनुष की परफॉर्मेंस इसे खास बना देती है।
और जब जीशान अय्यूब और धनुष एक ही स्क्रीन पर आते हैं—फिल्म अपनी रूह दिखाती है।
यदि रांझणा आपको पसंद आई थी, तो Tere Ishk Mein भी आपके दिल में उसी एहसास को जगाएगी।
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