Bhilwara Sur Sangam 2026 का भव्य समापन, नई दिल्ली में यादगार प्रस्तुतियों ने बांधा समां
दिग्गज हिंदुस्तानी गायक पं. मुकुल शिवपुत्र की खयाल प्रस्तुति रही समापन संध्या का मुख्य आकर्षण
नई दिल्ली, 5 अप्रैल 2026:
नई दिल्ली में भव्य समापन, दर्शकों की शानदार मौजूदगी
एलएनजे Bhilwara ग्रुप द्वारा प्रस्तुत भारतीय शास्त्रीय संगीत उत्सव
‘Bhilwara Sur Sangam’ का 13वां संस्करण 5 अप्रैल को कमानी ऑडिटोरियम,
नई दिल्ली में संपन्न हुआ। यह संध्या बेहद शानदार रही।
पहले दिन की सफल शुरुआत के बाद, दूसरे दिन
भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। संगीत प्रेमी, रसिक और कला सराहकों की उपस्थिति ने
आयोजन को और खास बना दिया। इस तरह, दो दिवसीय यह उत्सव यादगार बन गया।

समन्वय सरकार की सितार प्रस्तुति ने बांधा समां
शाम की शुरुआत श्री समन्वय सरकार की सितार प्रस्तुति से हुई।
उनकी प्रस्तुति आकर्षक और प्रभावशाली रही।
एक ओर, उनकी तकनीकी कुशलता साफ नजर आई।
वहीं दूसरी ओर, भावनात्मक गहराई ने श्रोताओं को बांधे रखा।
इसके अलावा, रागों पर उनकी मजबूत पकड़ भी देखने को मिली।
लय की सूक्ष्म समझ ने प्रस्तुति को और समृद्ध बनाया।
नतीजतन, श्रोताओं के साथ उनका गहरा जुड़ाव बना।
प्रस्तुति के बाद उन्होंने कहा,
“Bhilwara Sur Sangam में प्रस्तुति देना हमेशा खास होता है।
यहां के श्रोता संगीत को गहराई से समझते हैं और खुले मन से सुनते हैं।”
उन्होंने आगे जोड़ा,
“इससे कलाकार को राग की आत्मा व्यक्त करने
का अवसर मिलता है। आज श्रोताओं की ऊर्जा ने मुझे बेहद संतोष दिया।”
पं. मुकुल शिवपुत्र की गायकी ने रचा आध्यात्मिक माहौल
इसके बाद, शाम का मुख्य आकर्षण पं. मुकुल शिवपुत्र की प्रस्तुति रही।
वे हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के दिग्गज गायक माने जाते हैं।
उनकी शैली आत्ममंथन और आध्यात्मिकता से भरी होती है।
इस बार भी उन्होंने श्रोताओं को एक ध्यानपूर्ण अनुभव दिया।
उनके जटिल आलाप बेहद प्रभावशाली रहे।
साथ ही, गहरी भावनात्मक अभिव्यक्ति ने माहौल को विशेष बना दिया।
इस प्रकार, भारतीय शास्त्रीय संगीत की ऊंचाई स्पष्ट नजर आई।
उन्होंने कहा,
“मेरे लिए संगीत एक आंतरिक यात्रा है।
यह केवल प्रस्तुति नहीं, बल्कि साधना है।”
उन्होंने आगे कहा,
“ऐसे मंच इस जुड़ाव को सामने लाते हैं।
यहां का शांत माहौल संगीत को खुलकर विकसित होने देता है।”
उत्सव की परंपरा और सांस्कृतिक प्रतिबद्धता
दूसरे दिन की प्रस्तुतियों ने पहले दिन की ऊंचाई को बनाए रखा।
साथ ही, इसने उत्सव की प्रतिबद्धता को और मजबूत किया।
यह मंच भारत की विविध संगीत परंपराओं को बढ़ावा देता है।
इसलिए, यह आयोजन सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बन गया है।
आयोजकों ने जताई खुशी और गर्व
उत्सव के समापन पर चेयरमैन श्री रवि झुनझुनवाला ने खुशी जताई।
उन्होंने कहा,
“भीलवाड़ा सुर संगम हमारी समृद्ध संगीत विरासत का उत्सव है।
यह मंच कलाकारों और श्रोताओं को जोड़ता है।”
इसके अलावा, उन्होंने कहा,
“दोनों दिनों का शानदार प्रतिसाद हमारे संकल्प को मजबूत करता है।”
उन्होंने आगे जोड़ा,
“यह केवल आयोजन नहीं, बल्कि एक परंपरा है।
हमें इसे आगे बढ़ाने पर गर्व है।”
खास बात यह रही कि उन्होंने नई पीढ़ी का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि युवा इस विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।
शास्त्रीय संगीत की ताकत फिर हुई साबित
अंततः, दोनों दिनों में भारी संख्या में दर्शक मौजूद रहे।
इससे उत्सव की लोकप्रियता साफ दिखी।
Bhilwara Sur Sangam 2026 ने फिर साबित किया कि
शास्त्रीय संगीत आज भी प्रासंगिक है। यह लोगों को जोड़ता है
और सांस्कृतिक संबंध मजबूत करता है।
हर साल आयोजित होने वाला यह उत्सव एक महत्वपूर्ण पहल बन चुका है।
यह कलाकारों और श्रोताओं के बीच संवाद को भी मजबूत करता है
ग्रुप द्वारा हर साल आयोजित किया जाने वाला यह उत्सव भारत की
शास्त्रीय कलाओं को बढ़ावा देने और कलाकारों व श्रोताओं के बीच सार्थक
संवाद को मजबूत करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल बना हुआ है।


