The Family Man 3 Review: श्रीकांत तिवारी की नई जंग रोमांचक मोड़…
FW Review
‘The Family Man 3’ में श्रीकांत तिवारी एक नए मिशन और नए दुश्मनों से भिड़ते नजर आते हैं। बेहतरीन अभिनय, मजबूत रिसर्च और रियलिस्टिक टोन इस सीजन की खासियत हैं।
21 नवंबर 2025, नई दिल्ली
मनोज बाजपेयी की बहुप्रतीक्षित सीरीज ‘The Family Man 3’ आखिरकार अमेज़न प्राइम वीडियो पर रिलीज हो गई है। पिछले दो सीजन्स की सफलता के बाद दर्शकों का उत्साह पहले से कहीं अधिक था। इस बार कहानी में कई नए चेहरे भी जुड़े हैं—जयदीप अहलावत, निमरत कौर और जुगल हंसराज की एंट्री ने कहानी को और गहराई दी है। सवाल यही था कि क्या तीसरा सीजन भी खुद को दर्शकों की उम्मीदों पर खरा उतार पाएगा?
कहानी: नया मिशन, नई चुनौती
सीजन की शुरुआत नागालैंड के कोहिमा में चल रहे एक पारंपरिक समारोह और अचानक हुए धमाकों की सीरीज से होती है, जो पूरे नॉर्थ-ईस्ट में तनाव फैला देती है। दूसरी तरफ श्रीकांत तिवारी (मनोज बाजपेयी) अपने परिवार के साथ नए घर की पूजा में व्यस्त हैं, लेकिन उनकी ज़िंदगी में शांति अब भी एक दुर्लभ चीज़ है।
टास्क फोर्स का अहम हिस्सा होने के नाते, उन्हें लगातार देश पर मंडराते खतरों से निपटना है। इस बार उनका सामना होता है रुक्मा (जयदीप अहलावत) से—एक ड्रग डीलर, जो सिर्फ अपराधी नहीं बल्कि एक बड़े षडयंत्र के केंद्र में है। स्थिति तब बिगड़ती है जब नागालैंड में समझौते के दौरान श्रीकांत, उनके बॉस और स्थानीय नेता पर हमला होता है। हमले में दो लोगों की मौत हो जाती है और श्रीकांत खुद संदिग्ध बन जाते हैं।
श्रीकांत अपने परिवार के साथ अंडरग्राउंड हो जाते हैं और इस अराजकता के बीच सच्चाई तक पहुँचने की जंग शुरू होती है। शुरुआती दो एपिसोड थोड़े धीमे लगते हैं, लेकिन तीसरे एपिसोड के बाद कहानी पकड़ मजबूत कर लेती है और दर्शक फिर उसी स्पीड में बह जाते हैं, जैसा इस सीरीज के लिए जाना जाता है।
निर्देशन और लेखन: राज एंड डीके की खासियत
डायरेक्टर जोड़ी राज–डीके की कास्टिंग और रिसर्च हमेशा की तरह शानदार है। नॉर्थ-ईस्ट पर आधारित कहानी में उन्होंने वहीं के कलाकारों को प्रमुखता देकर किरदारों को प्रामाणिकता दी है। कोई दिखावटी ग्लैमर या अनावश्यक ड्रामा नहीं—सबकुछ कहानी की जरूरत के हिसाब से सधा हुआ।
स्क्रीनप्ले में कई घटनाएं समानांतर चलती हैं, लेकिन फिर भी कहानी का धागा ढीला नहीं पड़ता। तनाव, हास्य और भावनाओं का बैलेंस अच्छी तरह साधा गया है।
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अभिनय: मनोज बाजपेयी फिर साबित करते हैं कि वो ‘वन मैन आर्मी’ हैं
मनोज बाजपेयी का अभिनय फिर एक बार शो को ऊँचाई देता है। श्रीकांत के भीतर चल रहा संघर्ष—परिवार की सुरक्षा और देश के प्रति जिम्मेदारी—दोनों को उन्होंने सहजता से जिया है। उनके साथ प्रियामणि का अभिनय भी दिल जीतता है, खासकर जब सुची और श्रीकांत की रिश्ते की खटपट कहानी में इमोशनल लेयर जोड़ती है।
जयदीप अहलावत रुक्मा के रूप में सीजन की जान हैं। उनकी सहज खलनायकी और किरदार की गहराई कहानी को और मजबूत बनाती है। शारिब हाशमी (जेके) एक बार फिर अपने ह्यूमर से गंभीर माहौल में राहत देते हैं। वेदांत सिन्हा और महक ठाकुर भी अपने-अपने किरदारों में फिट बैठते हैं।
क्या अच्छा है?
- नॉर्थ-ईस्ट की संस्कृति, लोकेशंस और राजनीतिक स्थिति की गहरी रिसर्च
- मनोज बाजपेयी और जयदीप अहलावत का दमदार अभिनय
- रियलिस्टिक एक्शन और प्रामाणिक कहानी
- टीमवर्क और संबंधों को खूबसूरती से बुनने वाला नैरेटिव क्या कमज़ोर पड़ता है?
- शुरुआती दो एपिसोड धीमे और थोड़ा बोझिल
- कुछ इमोशनल सीन्स उतने प्रभावी नहीं जितने होने चाहिए थे
- रुक्मा और बॉबी की ट्रैक को थोड़ी और स्क्रीनटाइम की जरूरत थी देखें या न देखें?
‘The Family Man 3’ पूरी तरह परफेक्ट नहीं है, लेकिन यह निश्चित रूप से एक एंगेजिंग और रियलिस्टिक स्पाई-थ्रिलर है। मनोज बाजपेयी के फैंस के लिए यह सीजन देखने लायक है, और जयदीप अहलावत की प्रस्तुति इसे और मजबूत बनाती है। भले ही यह पिछले सीजन्स जितना प्रभावशाली न लगे, लेकिन कहानी का यथार्थवादी ट्रीटमेंट और अभिनय इसे एक बार देखने लायक जरूर बनाते हैं।
अगर आप इमोशनल, टैक्टिकल और ग्राउंडेड स्पाई ड्रामा पसंद करते हैं—तो यह सीजन मिस न करें।