Kis Kisko Pyaar Karun 2 Review: Kapil Sharma की मस्ती फिर लौटी,…

Kis Kisko Pyaar Karun 2 Review: Kapil Sharma की मस्ती फिर लौटी, हंसी तो आएगी लेकिन दिमाग लगाना मत!

चार धर्म, चार शादियां और एक Kapil Sharma—फिल्म हल्की-फुल्की कॉमेडी पेश करती है, पर कहानी और लॉजिक में कई जगह निराश भी करती है।

12 दिसंबर 2025, नई दिल्ली

Kapil Sharma अपनी हिट कॉमेडी फ़्रैंचाइज़ी Kis Kisko Pyaar Karun के दूसरे भाग के साथ फिर बड़े पर्दे पर लौट आए हैं। दर्शकों के बीच Kapil Sharma की कॉमिक टाइमिंग की हमेशा डिमांड रही है, और इस बार भी वे हंसी का तड़का लगाने की पूरी कोशिश करते हैं। लेकिन क्या यह फिल्म पहले वाले मैजिक को दोहरा पाती है या नहीं—यही है इस रिव्यू का सार।

कहानी

भोपाल का रहने वाला मोहन शर्मा (Kapil Sharma) सानिया (वरीना हुसैन) से शादी करना चाहता है, लेकिन किस्मत उसके सामने ऐसी परिस्थितियाँ खड़ी करती है कि उसे एक नहीं बल्कि तीन और महिलाओं—रूही (आयशा खान), मीरा (त्रिधा चौधरी) और जेनी (पारुल गुलाटी)—से भी शादी करनी पड़ जाती है।

फिल्म की पूरी कहानी इन्हीं चार शादियों को छुपाने की जद्दोजहद और एक के बाद एक गड़बड़ियों की कॉमेडी पर आधारित है।
मोहन का असली प्यार कौन है और वह इस उलझन से कैसे निकलता है? यह फिल्म देखकर ही पता चलता है।

अभिनय

Kapil Sharma की कॉमिक टाइमिंग अभी भी उनकी सबसे बड़ी ताकत है। पंचलाइन और फनी सीन में वे शानदार हैं, और यह फिल्म उसी पर टिकी हुई है।
हालांकि, रोमांटिक या भावुक दृश्यों में वे थोड़े कमजोर लगते हैं और यह फर्क साफ दिखता है।

चार हीरोइनों में से आयशा और त्रिधा अच्छा काम करती हैं, उनकी स्क्रीन प्रेजेंस मजबूत है।
पारुल गुलाटी कुछ जगहों पर फीकी पड़ती दिखती हैं।
वरीना का अभिनय सबसे कमजोर रहा—पूरी फिल्म में उनके एक्सप्रेशन एक जैसे ही दिखते हैं।

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मनजोत सिंह फिल्म को शानदार सपोर्ट देते हैं, और उनके कई दृश्य वाकई मजेदार हैं।
विपिन शर्मा, अखिलेंद्र मिश्रा और असरानी जैसे अनुभवी कलाकार कहानी को मजबूती देते हैं।
जैमी लीवर की ओवरएक्टिंग थोड़ी परेशान करती है और उनका किरदार अटपटा लगता है।

म्यूजिक

हनी सिंह का गाना ठीक-ठाक है, लेकिन बाकी गाने प्रभाव नहीं छोड़ते।
ओपनिंग का रोमांटिक ट्रैक शुरुआत में ही बोर करता है।
त्रिधा और कपिल वाला गाना भी कहानी में फिट नहीं बैठता और जबरदस्ती जोड़ा गया महसूस होता है।
बैकग्राउंड म्यूजिक परिस्थिति के अनुरूप है, इसलिए वह चलता है।

क्या अच्छा है?

फिल्म में चार धर्मों का जिक्र है, लेकिन कहीं भी कोई ऐसा मज़ाक या डायलॉग नहीं जिससे किसी को ठेस पहुंचे—यह लिखावट की जीत है।

Kapil Sharma अपने अंदाज़ से कई अच्छी हंसी दिलाते हैं।

मनजोत, विपिन शर्मा और अखिलेंद्र मिश्रा जैसे कलाकार कई सीन्स को उठाते हैं।

कुछ हिस्सों में फिल्म साफ तौर पर मनोरंजन करती है।

क्लाइमैक्स में एक छोटा-सा सरप्राइज है, जो ठीक लगता है।

कहां कमी रह गई?

सबसे बड़ी कमी—लॉजिक।
कहानी में तर्क खोजने की गलती बिल्कुल मत कीजिए।
फिल्म केवल मज़ेदार परिस्थितियों पर चलती है, इसलिए प्लॉट कई जगह बिखरा सा लगता है।

वरीना के एक्सप्रेशन्स फिल्म की सबसे बड़ी निराशा हैं।
क्लाइमैक्स हास्यभरा है, लेकिन उतना दमदार नहीं जितना होना चाहिए था।

देखें या नहीं?

अगर आप परिवार के साथ कोई हल्की-फुल्की, दिमाग न लगाने वाली कॉमेडी देखना चाहते हैं, तो यह फिल्म वीकेंड पर एक बार देखी जा सकती है।
पर अगर नहीं देखी, तो भी बहुत कुछ मिस नहीं होने वाला।

फिल्म बस एक ही शर्त पर मज़ा देगी—दिमाग घर पर छोड़कर जाएं।

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