‘Taskaree: The Smuggler’s Web’ रिव्यू: शांत अंदाज़ में खुलती स्मगलिंग की दुनिया,…
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नीरज पांडे की नई वेब सीरीज ‘Taskaree: The Smuggler’s Web’ इंटरनेशनल स्मगलिंग नेटवर्क की हकीकत दिखाती है, जहां इमरान हाशमी की सधी हुई एक्टिंग कहानी को मजबूती देती है।
14 जनवरी 2026, नई दिल्ली
इमरान हाशमी और शरद केलकर स्टारर वेब सीरीज ‘Taskaree: The Smuggler’s Web’ आज नेटफ्लिक्स पर रिलीज हो चुकी है। नीरज पांडे के बैनर फ्राइडे स्टोरीटेलर्स के तहत बनी यह 7 एपिसोड की क्राइम ड्रामा सीरीज उस स्मगलिंग की दुनिया को दिखाती है, जो आमतौर पर पर्दे के पीछे छिपी रहती है। यह कहानी सिर्फ एक शहर या देश तक सीमित नहीं है, बल्कि एक बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की परतें खोलती है।
कहानी
सीरीज की शुरुआत एयरपोर्ट के जरिए होने वाली तस्करी से होती है, जहां महंगी घड़ियां, ब्रांडेड बैग, सोना, विदेशी करेंसी और नशीले पदार्थ एक देश से दूसरे देश पहुंचाए जाते हैं। कहानी यह दिखाती है कि कैसे तस्कर सिस्टम की खामियों, कस्टम ड्यूटी और सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरियों का फायदा उठाते हैं।
इसके बाद कहानी मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर केंद्रित हो जाती है, जहां कस्टम्स विभाग की एक टीम इन गैरकानूनी गतिविधियों पर लगाम लगाने की कोशिश करती है। टीम का नेतृत्व करते हैं अर्जुन मीणा (इमरान हाशमी), जो एक ईमानदार और नियमों पर चलने वाले कस्टम्स अधिकारी हैं।
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ती है, अर्जुन को एहसास होता है कि तस्कर हमेशा कानून से एक कदम आगे रहते हैं। फर्जी दस्तावेज़, गुप्त कोड और सिस्टम के भीतर मौजूद लोगों की मदद से वे बच निकलते हैं। इसी नेटवर्क के पीछे है बाबा चौधरी (शरद केलकर), जो बिना ज्यादा दिखे पूरे स्मगलिंग धंधे को नियंत्रित करता है। जब कस्टम्स की कार्रवाई उसकी कमाई पर असर डालने लगती है, तो टकराव और भी तेज हो जाता है, जिसका असर अफसरों की निजी जिंदगी पर भी पड़ता है।
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अभिनय
इमरान हाशमी ने अर्जुन मीणा के किरदार को बेहद संयम और गंभीरता के साथ निभाया है। बिना ऊंची आवाज़ या ओवरड्रामा के उनका अभिनय असर छोड़ता है। शरद केलकर बाबा चौधरी के रोल में शांत रहते हुए भी खतरनाक लगते हैं।
अमृता खानविलकर, नंदिश सिंह संधू, फ्रेडी दारूवाला और जमील खान जैसे कलाकारों ने भी अपने किरदारों को मजबूती दी है और कहानी को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है।
निर्देशन
नीरज पांडे और राघव एम जैरथ का निर्देशन सीरीज को गंभीर और संतुलित टोन देता है। यहां जरूरत से ज्यादा एक्शन या मसालेदार ड्रामा नहीं है। जांच की प्रक्रिया को धीरे, लेकिन साफ और विश्वसनीय तरीके से दिखाया गया है। हालांकि कुछ एपिसोड्स की रफ्तार थोड़ी धीमी लग सकती है।
कमियां
कुछ जांच से जुड़े सीन दोहराव वाले महसूस होते हैं, जिससे सीरीज कहीं-कहीं खिंची हुई लग सकती है। तेज रफ्तार थ्रिलर पसंद करने वाले दर्शकों को यह थोड़ा स्लो लग सकती है।
देखें या नहीं?
‘Taskaree: The Smuggler’s Web’ एक गंभीर, सच्चाई के करीब रहने वाली क्राइम सीरीज है। बड़े ट्विस्ट भले न हों, लेकिन मजबूत कहानी, यथार्थवादी माहौल और दमदार अभिनय इसे देखने लायक बनाते हैं। अगर आपको रियलिस्टिक और समझदारी से बनी क्राइम कहानियां पसंद हैं, तो यह सीरीज जरूर ट्राई की जा सकती है।
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